सूर्य से लाल ग्रह तक: भारत की वैज्ञानिक उड़ान
भारत का सूर्य मिशन: वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान
- भारतीय अंतरिक्ष संगठन (इसरो) ने आपने पहले शोर मिशन आदित्य एल-1 का परीक्षण 2 सितंबर 2023 को किया ।
- इसका परीक्षण PSLV-C57 रॉकेट का उपयोग करके किया गया ।
- आदित्य एल 1, 1.5 मिलियन Km की दूरी से सूर्य का अध्ययन करने वाला पहला अंतरिक्ष आधारित वेधशाला श्रेणी का भारतीय शोर मिशन है ।
- अंतरिक्ष यान को सूर्य पृथ्वी प्रणाली के legregion बिन्दु 1(L1) के चारो ओर एक प्रभामंडल कक्ष में स्थपित करने की योजना है ।
- आदित्य एल-1 का प्राथमिक उद्देश्य सूर्य के व्यावहार और वे पृथ्वी को कैसे प्रभावित करते, के सम्बंध में गहरी समझ हासिल करना है ।
भारत का मंगल मिशन
भारत वैज्ञानिकों द्वारा पूर्ण रूप से तैयार मंगल मिशन जिसे मंगल यान नाम दिया गया है, 24 सितंबर 2014 oo सुबह 8 बजे मंगल की कक्षा मे प्रवेश कर गया । इसके साथ ही आपने पहले प्रयास मे ही मंगल पर पहुंचने वाला भारत विश्व का पहला देश बन गया है ।
इसरो द्वारा मंगल यान नामक अपनी अंतरिक्ष परियोजना के अंतर्गत 5 नवंबर 2013 को मंगल ग्रह की परिक्रमा करने हेतु एक उपग्रह आंध्र प्रदेश के श्री हरि कोटा स्थित सतीश धावन अंतरिक्ष केन्द्र से ध्रुवीय उपग्रह परीक्षण यान PSLVC-25 के द्वारा सफलतापूर्वक छोडा गया था।अमेरिका, रूस और यूरोपीय संघ के बाद भारत मंगल की कक्ष me प्रवेश करने वाला पहला देश बन गया ।भारत एशिया का पहला देश है को मंगल की कक्ष में दाखिल हुआ।
मंगल यान मे लगे उपकरणों का उपयोग भविष्य मे मौसम, जमीन खेती और संचार उपग्रहों मे किया जा सकेगा।
मंगल यान मंगल ग्रह से निकटतम स्थिति मे आने पर मात्र 365 km दूर रहेगा, जबकि सबसे दूर होने पर 8000km दूर रहेगा।
मंगल मिशन की कुल लागत 450 करोड़ रुपये है
नासा ISA,और रुस Kosmosos के बाद इसरो मंगल ग्रह की कक्ष में दाखिल हुआ ।